ईको-फ्रेंडली कपड़े बनाना शायद एक उभरते हुए डिज़ाइनर के दिमाग में आखरी ख्याल होगा। हालांकि, देवयानी खरबंदा अच्छे डिज़ाइन को सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ मिलाने के लिए प्रेरित हैं। और ध्यान देने की बात यह है कि वह अभी भी एक लोकप्रिय दिल्ली के फैशन स्कूल की छात्रा हैं। इसके अलावा, ऐमेज़ॉन इंडिया फैशन वीक के नवीनतम एडिशन में, उनका कलेक्शन पहले ही प्रदर्शित किया जा चुका है।

जब वह 3 साल की थी, उनका परिवार देहरादून से दिल्ली में शिफ्ट हुआ। देवयानी याद करती हैं, “मैं भाग्यशाली रही हूँ कि मुझे बचपन से ही जहाज़ों में दुनिया की सैर करने का मौका मिला। मेरी माँ एक सुपर टैलेंटेड और कलात्मक व्यक्ति होने के कारण, यह सुनिश्चित करती थी कि मेरा बड़ा भाई और मैं दिल्ली की सभी ड्राइंग प्रतियोगिताओं में भाग लें। उन्होंने मुझे कढ़ाई, शिल्प, पेंटिंग, आदि जैसे डिज़ाइन तत्वों के बारे में जानकारी भी दी।”

जब अच्छे दामों वाले प्राइस टैग्स पर निर्भर रहना आजकल एक कल्चर बन गया है, तो देवयानी अपने कलेक्शन ‘रौनक’ से इस प्रवृत्ति को बदल रही हैं। हमें रीसाइक्लिंग ऑप्शंस की कमी है, और कपड़ों के उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बाजार का आधार होना चाहिए।

क्राफ्टिंग ड्रीम

देवयानी पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन, दिल्ली में फैशन डिजाइनिंग के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। उसने नए कपड़ों की एक कलेक्शन को डिज़ाइन करने के लिए ‘कतरन’ (जो कि कपड़े बनाने के बाद अनावश्यक बेकार कपड़ा बच जाता है) का उपयोग किया। “मैं बचपन से ही अच्छे कपड़ों और जूतों से बने-ठने लोगों से आकर्षित हुआ करती थी। मेरा आर्ट एंड क्राफ्ट की ओर रुझान वैसे भी था और फिर मैं अपनी माँ की आभारी हूँ, जो मैंने एक फैशन डिज़ाइनर बनने का फैसला किया,” उन्होंने कहा।

आइडिया का आविष्कार

देवयानी से बात करते हुए उन्होंने बताया, “मैं अपने आखिरी प्रोजेक्ट में प्रेरणा के रूप में भारत की शादियों पर काम कर रही थी। उस समय के दौरान सौभाग्य से या दुर्भाग्य से डीमोनेटाईज़ेशन हुआ। तभी मेरी संरक्षक, अंबिका मगोत्रा ने सुझाव दिया कि मुझे भारतीय शादियों पर डीमोनेटाईज़ेशन का प्रभाव दिखाना चाहिए। जैसा कि आजकल शादी के कपड़े बेहद महंगे होते हैं, मैंने सोचा कि क्यों न ऐसे कपड़ों का उपयोग किया जाए जो कपड़ों को सुशोभित करने में ज़्यादा महंगे न हो और उन्हें अद्वितीय, अलग और पहनने योग्य बना सकें। उस वक़्त मुझे कतरन के उपयोग के बारे में सूझा, जो मैंने अपने कॉलोनी में और आस-पास के दर्ज़ियों से इकट्ठे किए। मैंने पुरानी तकनीकों को मिलाया जैसे कोचिंग, योयो फूल, बेकार फैब्रिक टेसल, आदि”.

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विशिष्टता

उत्साह से भरपूर देवयानी ने बताया, “ये वस्त्र डिज़ाइन और इनके सतह का अलंकरण मेरे द्वारा किया गया है। मैंने इसी तरह से अपनी नई श्रेणी विकसित करना शुरू कर दिया है। और मुझे पहले से ही ऑर्डर मिल रहे हैं।”

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जब पूछा गया कि बाज़ार में उनके डिज़ाइन इतने कुशल और सर्वश्रेष्ठ होने की वजह क्या है तो उन्होंने बताया, “मेरी यूएसपी बेकार फैब्रिक का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के सतहों को विकसित करना है। मेरा लक्ष्य 20 से 30 वर्ष की आयु के बीच की लड़कियाँ हैं जो ट्रेंड के साथ जाने के बजाए कुछ नया एक्सपेरिमेंट करने के लिए तैयार रहती हैं।”

अधिक से अधिक महिलाएँ स्वतंत्र हो रही हैं। यह स्वतंत्रता डिज़ाइनरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निचले स्तर पर काम करने वाले वर्कर्स भी इसमें शामिल हैं।

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रीसाइक्लिंग और अधिक

हमने उनसे उस प्रोत्साहन के बारे में पूछा, जिसने उन्हें भारतीयों के लिए पर्यावरण के अनुकूल कपड़े बनाने के लिए प्रेरित किया। वे दावा करते हुए कहती हैं कि, “शो ख़तम होने के बाद, जनता के रीव्यूज और मीडिया बहुत उत्साहवर्धक रहे हैं, जिसने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया है। मेरे डिजाइन और बेकार कपड़े के उपयोग करने के विचार के लिए मुझे काफी प्रशंसा मिली। मैं सतह की बनावट पर बहुत ध्यान देती हूँ इसलिए मैं ज़्यादा पैसे खर्च किए बिना अपने कपड़ों को सुशोभित करती हूँ। जैसा कि आजकल डिज़ाइनर कपड़े बहुत ज़्यादा मूल्यवान होते हैं,  मेरे डिज़ाइन किए हुए कपड़े काफी दिलचस्प और आंखों को पकड़ने के साथ-साथ खरीदे जाने में बहुत अधिक खर्चीले न होने के कारण मुझे लोगों से सराहना मिली।”

मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात थी कि अपनी कलेक्शन ‘रौनक’ को मैंने अपने भाई के नाम पर रखा। वह मुझे प्रेरणा देता है और मुझे जीवन में हमेशा सही राह दिखाता है। इसलिए, अच्छा लग रहा है कि उसके नाम पर शुरू हुई मेरी पहली कलेक्शन बहुत अच्छा काम कर रही है।

भविष्य में, देवयानी डिज़ाइनों के बारे में और जानना चाहती हैं। और वह हमें बताती है कि एक बार अपनी डिग्री पूरी करने के बाद, वह एक एक्सपोर्ट हाउस के साथ कलैबोरेट करना चाहती हैं। और तब तक, वह कपड़ों को तैयार करने में अपना समय समर्पित कर रही हैं।

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