एक रिसर्च के अनुसार, भारतीय महिलाएँ सबसे ज़्यादा दुखी रहती हैं. पुरुषवादी समाज, सेक्सिस्म और रूढ़िवादी सोच इसके कारण हैं. इसलिए यह इंटरप्रेन्योर महिलाओं को अपने बारें में अच्छा महसूस करवाना चाहती हैं.

शीदपीपल.टीवी ने लाइफ-कोच कुशा कालरा से उनके वेंचर “हैप्पी लाइव्स” के विषय में बात करी.

हमें अपने एजुकेशनल बैकग्राउंड के बारें में कुछ बताइये.

मैं एक पोस्ट ग्रेजुएट हूँ. मैंने एमिटी यूनिवर्सिटी से इन्शुरन्स में स्पेशलाइजेशन की है. मैं ऑस्ट्रेलिया से एक सर्टिफाइड लाइफ कोच भी हूँ. मरे पास एक ट्रेनर के बहुत से सर्टिफिकेशन्स हैं जिन्होंने मुझे वर्कशॉप्स कंडक्ट करने में मदद करी है.

हैप्पी लाइव्स का विचार आपको कैसे और कब आया और इसका उद्देश्य क्या है?

“हैप्पी लाइव्स” एक बिज़नस पेज की तरह शुरू हुआ. इसके बाद मेरी अपनी वेबसाइट थी जिसके द्वारा महिलाएँ अपनी कहानियाँ एक दुसरे से बाँटती थी और अपने जीवन में परिवर्तन लाने का निर्णय लाना चाहती थी. हैप्पी लाइव्स के ज़रिये महिलाएँ अपने दिल की बात बिना किसी संकोच के एक दुसरे से कह सकती हैं. मैं अपने वर्कशॉप्स की अप्डेट्स भी इसी पेज के द्वारा लोगों तक पहुँचाती हूँ. हैप्पी लाइव्स का उद्देश्य है महिलाओं को सशक्त बनाना. मैं यह अपने कोचिंग सेशंस के द्वारा करती हूँ.

अपने आप को एक इंटरप्रेन्योर की तरह लांच करने में बहुत पैशन और संयम लगता है. मुझे लगता है कि अपने आत्मा विश्वास के कारण मैं जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना कर पाती हूँ – कुशा

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आपका यह वेंचर महिलाओं पर केंद्रित है. क्या भारतीय महिलाएँ एक बहुत तनाव भरा जीवन जीती हैं?

मुझे लगता है की दुनिया भर की महिलाएँ अपने परिवार, अपने बच्चों और अपने टीम मेंबर्स के लिए अलग अलग पत्र निभाती हैं. इस बीच वह खुद को भूल जाती हैं.
उनको इस बात का आभास नही होता कि खुद का ध्यान रखना और खुद से प्यार करना उनकी ख़ुशी और सफलता के लिए अनिवार्य है. महिलाओं को समझना होगा कि “सुपर-वुमन” बनने से वह खुद को हानि पहुँचाती हैं.

एन्त्रेप्रेंयूरल जर्नी में अनेक उतार – चढ़ाव होते हैं. आपका अनुभव कैसा रहा है?

मेरी जर्नी अगस्त २०१४ में शुरू हुई. मैं हमेशा से महिलाओं के साथ काम करना चाहती थी. मैंने स्क्रैच से शुरू किया. यह मेरी खुशकिस्मती थी कि मैं एक अच्छा नेटवर्क बना पायी. मैंने कॉरपोरेट प्रोजेशनल्स के साथ भी काम किया. मैंने धीरे धीरे उनके लिए वर्कशॉप्स डिजाईन करी.

मैं अपना बिज़नस ऑनलाइन भी कर रही हूँ ताकि लोगों को मेरी कहानी के बारें में पता चले. मुझे लगता है की जब एक महिला कुछ करने की ठान लेती है तो वो कुछ भी कर सकती है. ऑनलाइन बिज़नस का मतलब है कि मैं अपनी सुहूलियत के हिसाब से काम कर सकती हूँ. ट्रेवल करने से मुझे नए लोग मिलते हैं. सफलता की ओर मैंने पहला कदम तब लिया जब मैंने अपनी नौकरी क्विट करी और अपना बिज़नस शुरू किया.

अपने आप को एक इंटरप्रेन्योर की तरह लांच करने में बहुत पैशन और संयम लगता है. मुझे लगता है कि अपने आत्मा विश्वास के कारण मैं जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना कर पाती हूँ.

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एन्त्रेप्रेंयूर्शिप को बढ़ावा देने में टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका है?

टेक्नोलॉजी किसी भी इंटरप्रेन्योर की उपस्थिति को बढ़ावा देने में मदद करता है. मैं इसकी मदद से केवल भारत में ही नही बल्कि पूरी दुनिया के लोगों से जुड़ सकती हूँ. मैं इसके माध्यम से कुछ ऐसे एन्त्रेप्रेंयूर्स, एसोसिएशनऔर फर्म्स से जुड़ पायी जो महिलाओं के लिए एन्त्रेप्रेंयूर्शिप को बढ़ावा देते हैं.

टेक्नोलॉजी एक ऐसा माध्यम है जिससे हम ऐसी कहानियों की बात कर सकते हैं जिससे महिलाओं को सशक्त होने का एहसास हो जिससे वह बदलाव की और आगे जाएँ.

खुश और सकारात्मक बने रहने का आपका क्या मंत्र है?

मैं वो सब करती हूँ जिससे मुझे ख़ुशी मिले. मैं हमेशा अपने दिल की ही सुनती हूँ और सकारात्मक सोच के द्वारा खुद को खुश रखती हूँ. मनुष्य को एक सुखद जीवन की प्राप्ति के लिए खुद को अपनाना ज़रूरी है.

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