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बूँद-बूँद करके अनु सृईधरण ने हुबली पे आए जल संकट का निवारण किया

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इनका पूरा जीवन विचित्र रूप से पानी से हुदा हुआ है. इस पहल का विचार उन्हे तब आया जब वे अपनी मित्र एमिली के साथ एक अनुसंधान परियोजना के तहत भारत आई. उन्हे लगा के हम अपना पूरा जीवन पानी के घरेलू साधन बनने की प्रतीक्षा करते हुए नहीं रह सकते. वह इस समस्या की जड़ तक जाना चहिती थी, जिस कारण से उन्होने उद्ययमी मार्ग लिया. वे अपने काम से पानी की बचत एवं सही इस्तामाल फैलाना चाहती थी. अनु 2010 में भारत आई, जिसके फलस्वरूप “नेक्स्टड्रोप” का जानम हुआ.

अनु सृईधरण, अपनी यात्रा के बारे में कुच्छ बताइए. आपने किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना किया?

असल में NextDrop मेरा आइडिया नहीं था, बल्कि एक कॉलेज प्रॉजेक्ट था. मैं और मेरी मित्र एमिली कंपेल यूनिवर्सिटी ऑफ कॅलिफॉर्निया, बर्क्ली से Phd कर रहे थे. मेरी रिसर्च विकासशील देशों में पाइप्ड नेटवर्क सिस्टम के अनुकूलन पर थी और दूसरी ओर मेरी मित्र एमिली की रिसर्च इन देशों में पानी के गुणवत्ता की कसौटी मापने की थी. हुबली में वह पूरा दिन अपने सॅंपल्स लेने के लिए पानी आना की प्रतीक्षा करती थी, बिना किसी अंदाज़े के, के पानी कब आएगा. हम लोग इस समस्या को अपने साथ वापस कॉलेज ले गये जहाँ और शिष्यों के साथ मिल कर हुँने मोबाइल बेस्ड उपाय तैय्यर किया. फलस्वरूप हुँने एक पाइलट प्रॉजेक्ट शुरू किया जिसे ‘नाइट फाउंडेशन’ द्वारा पुरूस्कृत भी किया गया, जिसके 4 वर्ष बाद नेक्स्ट ड्रॉप का जानम हुआ.

नेक्स्ट ड्रॉप के बारे में हुआमें कुच्छ और बताइए?

नेक्स्ट ड्रॉप ने अनियमित जल सेवा की समस्या का एक नियमित उपाय निकाला है. भारत के कई शहरों में, लोगों को यह तो पता होता है के उनको जल सेवा दिन में सिर्फ़ कुच्छ ही घंटे  मिलेगी, पर यह नहीं पता होता के कब. नेक्स्ट ड्रॉप असल में सिर्फ़ एक अपडेट है, मुसिपालिटी से नागरिक को. यह मेसेज पानी आने के 1 घंटे आ जाता है, और सरकारी कर्मचारियों को भी लीकेज व सप्लाइ कमी के बारे में जानकारी देता है.

 अपने स्टार्ट्प ‘नेक्स्ट ड्रॉप’ को शुरू करते हुए आपने क्सि प्रकार की चुनौतियों का सामना किया?

बाकी सभी स्टारट्प्स की तरह मैने भी समान चुनौतियों का सामना किया- निधियों, साधनों व ढुलाई को जोड़ना मुश्किल था. पर सबसे बड़ी चुनौती थी इस उमर में आदययमी बनना.

भारत में हो रहे वर्तमान डिजिटल बूम के बारे में आपका क्या कहना है?

यह बहुत बड़ा व शानदार परिवर्तन है, जिस तरह से टेक्नालजी पिछले कुच्छ वर्षों में बदली है, वाकई आकर्षक है. मुझे नहीं लगता के मैं नेक्स्ट ड्रॉप जैसा कुच्छ बिना टेक्नालजी के कर पाती. जब मैने शुरुआत की, मुझे इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी, तो मैने ऑनलाइन पढ़ाई की, किताबें पढ़ी. इस कार्न से मेरे गयाँ में वृत्ति हुई, पर आईं रोज कुच्छ नया सीखने का जज़्बा भी रखती हूँ.

 

 

 

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