हाँ. सन्नी एक पूर्व पोर्न्स्टार हैं. वे उसके  आगे काफ़ी लंबा रास्ता तय कर चुकी हैं. प्लेब्वाय मॅगज़ीन के लिए पेंटहाउस पेट बनने से ले  कर हिन्दी सिनिमा के अवॉर्ड शो में वो अनचाही दोस्त बनने से लेकर भारत में 3 वर्ष से सबसे ज़्यादा गूगल की जाने वाली हस्ती बनने तक, उन्होने बहुत कुच्छ देखा है. पर जब तक हमारी संस्कृति में पित्र्सत्ता का बोलबाला है, सन्नी लीयोन सिर्फ़ एक पोर्नस्टार की तरह ही जानी जाएँगी, जिसने बहुत पैसा कमाया.

CNN-IBN के भूपेंद्र चौबे और NDTV 24/7 के शेखर गुप्ता ने हाल ही में अपने अपने चॅनेल के लिए सन्नी के इंटरव्यू लिए. सन्नी अपनी आने वाली फिल्म मस्तिज़ादे के प्रचार में ज़ोर शोर से लगी हैं. आए कुच्छ गौर फरमाते हैं सन्नी से हुई इनकी वार्तालाप पे:

चौबे जी के सवालों से स्त्रिद्वेश की बू आ रही थी. उन्होने सन्नी से कहा, “आपका बीता हुआ कल आपका पीछा कभी नहीं चूडेगा. क्या आपको ऐसा लगता है के आपका कल आपको रोकता है?” इस सवाल पर सन्नी ने कहा, “मैं रुकी नहीं हूँ” और हमें खुशी है इस बात की! सन्नी, आप भारत की उन चंद महिलाओं में से हैं, जिन्होने अपने हिसाब से जीवन में फ़ैसले लिए हैं, और शायद इसीलिए चौबे जी जैसे पुरुष, जो अपने जीवन में महिलाओं को कुच्छ करने की आग्या देना या ना देना अपना अधिकार समझते हैं, आपसे इस प्रकार के बेतुके सवाल पूछते हैन. और ऐसे शो देखने और सराहने वाली हुमारे देश की जनसंख्या भी कुच्छ ऐसी ही है शायद.

उन्होने सन्नी को ‘पॉर्न क्वीन’ भी कहा. हाँ, वो तो हैं. वे विश्व की सबसे प्रसिद्ध पुरुषों की मॅगज़ीन, प्लेब्वाय द्वारा सबसे हॉट महिला सिर्फ़ 19 वर्ष की आयु में बनी, जो आसाआन तो नहीं रहा होगा. उन्होने सन्नी से यह भी पूछा के यदि वो भविष्य में सिर से पैर तक ढके हुए कपड़े पहने हुए कोई रोल करेंगी. मेरे हिसाब से नहीं, खास तौर पे तब तक, जब तक हम उनकी पहचान उनके शरीर की छवि से करते रहेंगे.

बिना किसी की नाक तोड़े ऐसे अभद्र सवालों का मुस्कुराकर जवाब देने पर हम सन्नी को मुबारकबाद देना चाहेंगे.

अब बात करते हैं शेखर गुप्ता के साथ उनके दूसरे इंटरव्यू की, जिसमे उन्होने “वॉक थे टॉक” किया. इंटरव्यू की शुरुआत में मुझे तोड़ा धक्का लगा, जिस प्रकार से गुप्ता जी ने सन्नी से उनके बॉलीवुड के एलीट क्लब का हिस्सा बनने पर सवाल किया. हलाकी हम यह भी मानेंगे की यह इंटरव्यू पिछले इंटरव्यू जितना बुरा नहीं था. पर इस बात को भी इग्नोर नहीं किया जेया सकता की दोनो ही इंटरव्यू में ज़्यादातर प्रश्न उनके पॉर्न करियर और उनकी छवि को लेकर पूछे गये. मुझे लगता है की सन्नी एक बहुत ही समझदार स्त्री हैं, और किसी को उनसे सही सवाल पूछने की आवश्यकता है. गुप्ता जी ने कई गहरे सवाल भी पूछे जिन्होने हुमारे समाज की कई संरचनात्मक समस्याओं पे भी रोशनी डाली.

हम सेक्स और सेक्षुवालिटी जैसे शब्दों से एक अजीब तरह से ग्रस्त हैं. जबसे हू इनके बारे में सीखते और समझते हैं, तब से हम इसे हासिल करने की दौड़ में शामिल हो जाते हैं. जीवन आइन हम जो कुच्छ भी करते हैं, सब कुच्छ एक बहतर पार्ट्नर के लिए ही तो होता है- अच्छी नौकरी, बहतर कपड़े और घर, सब कुच्छ एक मनचाहा यौन साथी पाने के लिए. मास्लो के जीवन त्रिकोण आइन सेक्स और खाना सबसे नीचा आता है, यह सभी हुमारी बुनियादी ज़रूरतें हैं. तो फिर क्यों हम लोग इससे इतना जुड़ गये हैं, के किसी भी वास्तु या व्यक्ति को हम इसके अलावा किसी और नज़रिए से देख ही नहीं पा रहे?