भारतीय महिलाएँ कहाँ गयी हैं? हमने अक्सर यह प्रश्न खुद से पूछा है और इसके कारण जानने की भी कोशिश की है. शीदपीपल.टीवी और वेदिका स्कॉलर्स द्वारा आयोजित वीमेन राइटर्स फेस्ट ने इसी बात पर चर्चा करी.

” हम भारतीय महिलाएँ विश्व जनसँख्या की केवल ८% हैं. हम भारत का जीडीपी तब तक नही बदल सकते जब तक हम इस प्रतिशत को तब तक नही बदल सकते जब तक हम इस प्रतिशत को काम न कर दे. “लीडरशिप बाई प्रॉक्सी” की लेखिका पूनम बरुआ ने कहा,”ऐसा नही है कि हमारे पास आवाज़ें नही हैं. मुसीबत यह है कि हमारी आवाज़ें पुरुषों तक पहुँच नही रही हैं. पूनम ने अपनी किताब लिखने के लिए ६००० महिलाओं से बात करी थी.

पेंगुइन रैंडम हाउस कि एडिटर-इन-चीफ मिली ऐश्वर्या इसको एक अलग दृष्टि से देखती हैं. “जब मैं अपनी टीम को देल्हटी हूँ, तो उनमें से ९०% महिलाएँ है और मुझे इस बात से बहुत ख़ुशी मिलती है. पर अगर मैं बाकी डिपार्टमेंट्स की बात करूँ जैसे सेल्स, फाइनेंस. तो मेरे अपने फर्म में महिलाओं कि जनसँख्या काम होने लग जाती है.

शीदपीपल.टीवी और वेदिका स्कॉलर्स द्वारा आयोजित वीमेन राइटर्स फेस्ट ने इसी बात पर चर्चा करी.

जो महिलाएँ काम नहीँ करती, उनके विषय में उन्होंने कहा, “इस प्रश्न का उत्तर ग्रासरूट लेवल पर मिल सकता है. महिलाएँ बहुत ही छोटी आयु में काम करना छोड़ देती हैं जिससे वह एक अहम् अवसर खो देती हैं. दूसरी ओर, महिलाओं कि एक बार शादी हो जाने के बाद वह बहार काम नहीँ करती या उनके परिवार उन्हें करने नहीँ देते. वह काफी योग्य हैं पर वह काम नहीँ करती. आखिर में, माँ बनने के बाद उनका काम करना और भी कठिन हो जाता है.

इन महिलाओं को वापस लाने का एक ही उपाय है. उन्हें वापस आने के लिए प्रेरित करना.

फॅमिली एंड बिज़नस कि फाउंडर “सोनू भसीन”, पारिवारिक व्यवसाय में काम कर रही महिलाओं के विषय में बात करती है. वह कहती है,” महिलाओं से साफ़ कह दिया जाता है कि कुछ भी करो पर पारिवारिक व्यवसाय से दूर रहो.”

शीदपीपल.टीवी और गोल्फिंग इंडियन की फाउंडर शैली चोपड़ा के अनुसार एन्त्रेप्रेंयूर्शिप में काम कर रही महिलाएँ एक ऐसा विचार है जिससे सब सशक्त बन सकते हैं. “एन्त्रेप्रेंयूर्शिप ने महिलाओं को अपनी कुशलता साबित करने के लिए अनेक अवसर देता है.”

उन्होंने एन्त्रेप्रेंयूर्शिप के विषय में बात करते हुए कहा की जो महिलाएँ इंटरप्रेन्योर बनती हैं वह अपने घर से भी काम कर सकती हैं. ” मेरी एन्त्रेप्रेंयूर्शिप और मातृत्व की जर्नी एक साथ शुरू हुई थी. मुझे बोला गया की यह मेरे लिए कठिन साबित हो सकता है. पर मुझे चुनौतियों से डर नहीँ लगता. “

अब आप समझ ही गए होंगे की महिलाएँ वर्कफोर्स से क्यों गायब हैं, उन्हें कैसे वापस लाया जा सकता है और वह कैसे शुरू कर सकते हैं.