अड्वर्टाइज़िंग और वॉल्ट डिज़्नी में प्रॉडक्ट मॅनेज्मेंट के उनके अनुभव मौल्श्रि सोमानि के हित में आ गये जब उन्होने उद्ययमी बनने का निर्णय लिया| अपनी रचनात्मकता को अपने ढंग से व्यक्त करने की चाह के चलते 2010 में उनकी डिज़ाइन कंपनी ‘व्हाटीफ़’ का जन्म हुआ| भक्ति माथुर द्वारा लिखी गयी बच्चों की किताब  ‘अम्मा टेल मी’ में उनके चित्र छापने के साथ उन्हे कामयाबी का अनुभव भी हुआ| मौलशरी अपने पति और बच्चे के साथ फिल्म नगरी बंबई में रहती हैं| शिथेपीपल की रीया दास से खास बातचीत में वे अपने अनुभवों के कुच्छ अंशों पर रोशनी डालती हैं||

ड्रॉयिंग से डिज़ाइनिंग तक: कुच्छ नया करने की अभिलाषा

मुझे याद भी नहीं तब से मुझे ड्रॉयिंग, कोलोरिंग और डिज़ाइनिंग का बहुत शौक था| मेरी दिलचस्पी को देखते हुए 10वी के बाद मेरी माँ ने मुझे एक कोर्स में भारती कराया, जो मैने 5 वर्ष तक किया| इस तरह मेरे करियर की शुरुआत हुई| इसके बाद मैने ग्रॅफिक डिज़ाइनर बनने का निर्णय लिया, जिसके चलते मैने अड्वर्टाइज़िंग के क्षेत्र में 7-8 साल तक कम किया| इसके बाद मैने वॉल्ट डिज़्नी में काम किया, जहाँ मैं उनके उपभोगता उत्पादों को बनाने वाली रचनात्मक टीम को संभाला||

साल बीतते गये और मुझे अहसाह होता रहा कि मैं एक 9 से 5 की नौकरी नहीं कर सकती थी| अतः अपनी खुद की डिज़ाइन कंपनी शुरू करने के ख्याल ने जानम लिया| मैने अपने जीवन में कई प्रयोग किए हैं, जो मैं आज भी करती हूँ| आज मैं किताबें, लोगो, टी-शर्ट आदि डिज़ाइन करती हूँ| असल मैं भिन्न प्रकार के काम करने से ही मेरी गाड़ी आयेज बढ़ती है||

मेरा बच्चा होने के बाद से मुझे ज़्यादा कुच्छ करने का समय नहीं मिलता| हलाकी हाल ही में मैने होम स्टाइलिंग के कोर्स में अपना नाम दाखिल किया है||

डिजिटल मीडीया मेरा प्रेरणा स्त्रोत है

मैं यह कहूँगी कि मैं ऑनलाइन बहुत रहती हूँ| अगर मुझे ऐसी कोई चीज़ दिखती है जो मुझे अचंभित करे, मैं उसे तुरंत करने लग जाती हूँ| कुच्छ महीनो पहले मैने इंटरनेट पर बच्चों के कुच्छ कपड़े देखे जिसमें ग्रॅफिक डिज़ाइन्स थे| प्रेरित होकर, मैने भी इन्हे बनाना शुरू कर दिया| मैं एक ही चीज़ बार- बार नहीं कर सकती, मुझे हमेशा कुच्छ नया करने की ज़रूरत होती है| यही पर डिजिटल मीडीया मेरी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्त्रोत बनता है||

रचनात्मक क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के लिए सलाह

सीखते रहो| कोशिश करते रहो| रचना से प्रेरणा लो| मैने इस क्षेत्र में 14 वर्ष बिताए हैं, पर मुझे आज भी लगता है कुच्छ नया सीखने के लिए हमेशा अपने दिल, आँख और कान खुले रखे| और सब कुच्छ सोखे| मैं तो यह कहुँची के 50 के होने तक भी सीखना नहीं बंद कर सकते| और हम तो कलाकार हैं, हमारे लिए हर रोज़ नये डिज़ाइन और नवाचार होते हैं| बोध करते रहे|

maulshree somani