पूर्णा सिनेमा घरों में ३१ मार्च को रिलीज़ हुई थी. इस फिल्म की बहुत प्रशंसा हो रही है. इसने एक पूरी पीढ़ी को जीवन में कुछ कर दिखने की प्रेरणा मिली है. यह जानकर अच्छा लगता हैं कि बॉलीवुड ने ऐसी फिल्में बनाना शुरू कर दिया हैं जो भारत में बदलाव ला सकती हैं.

जानिए इस फिल्म को देखने के ५ महत्त्वपूर्ण कारण

१. भारत के सामाजिक मुद्दों के विषय में जानने के लिए

अपनी १३ साल कि बेटियों पर शादी करने के लिए दबाव डालना, स्कूल कि अध्यापिकाओं का अपने काम की ओर ध्यान न देना, गांवों में विद्यालयों की स्थिति और पितृसत्ता कुछ इनसे मुद्दे हैं जो भारत को और यहाँ रहते बच्चों को आगे बढ़ने से रोकते है.

 

२. प्रेरित होने के लिए

एक ऐसी लड़की की कहानी बहुत ही प्रेरणा दयाक है जो बड़ी बड़ी चुनौतियों का सामना करके विश्व की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ने का प्रण लेती है .हम एक ऐसे देश में रहते हैं जो अपनी आधी जनसंख्या को इसलिए दंड देता है क्योंकि वह महिलाएं हैं. परंतु पूर्णा ने साबित कर दिया कि मनुष्य के लिंग और उम्र से हम किसी कि सफलता का पता नही लगा सकते. अंत में केवल दृणता कि जीत होती हैं.

 

३. अपने जीवन में मेंटर्स की भूमिका समझने के लिए

पूर्णा का जीवन तब बदला जब उसकी मुलाकात उसके मेंटर से हुई. उन्होंने पूर्णा को अपने अंदर विश्वास जगाने के सभी कारण दिए. उन्होंने उसको सफलता प्राप्त करने के लिए हमेशा प्रेरित किया.

 

४. जीवन में दोस्ती कि अहमियत समझना

गिलम में एक ऐसा सीन हैं जिसमें पूर्णा अपनी सहेली द्वारा लिखा हुआ एक पत्र पढ़ती हैं. उस पत्र का उस पर एक गहरा प्रभाव पड़ता हैं. उस पत्र के पढ़ने के बाद ही वह एवेरेस्ट चढ़ने के निर्णय लेती हैं. दोस्ती से प्यारा रिश्ता और कोई नही हैं. यह दोस्ती मनुष्य को जीवन में सदा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं.

 

५. जीवन में कुछ रिस्क्स लेने के लिए

 

घर से रॉक क्लाइम्बिंग कि ट्रिप के लिए भाग जाना, मौसम ख़राब होने के बावजूद पहाड़ चढ़ना कुछ ऐसे रिस्क्स हैं जो पूर्णा ने अपने जीवन को सफल बनने के लिए उठाये. जीवन का अर्थ ही रिस्क्स लेना हैं. रिस्क्स लेकर ही हम सफलता की ओर बढ़ सकते हैं.

ऐसी फिल्म बननी हमारे समाज के लिए ज़रूरी हैं क्योंकि यह बेटियों के अधिकार और उनके सपनो के विषय में बात करती हैं.