महीलाओं को यह समझना चाहिए की वह औरत होने या ना होने के बलबूते पर बिज़्नेस नही कर पाइएंगी, यह कहना है प्रांशु पत्नी का जो कल्चर आली नमक स्टार्ट उप की को फाउंडर है. उनके बिज़्नेस में गूगल के राजन आनंदन ने निवेश किया है. क्या यही कहानी है सबका सत्य? अनिषा डाला मी डाला डॉट कॉम की फाउंडर है और उनका मानना है की महीलायें फिल हाल नये वायपार में हिस्सा ज़रूर ले रही है किंतु क्या यह सीनियर पोज़िशन में दिखती है? क्या सीरीस ब, सीरीस सी जैसे अड्वान्स फंडिंग मे काफ़ी औरतें है? नही.

औरतों के लिए अन्य फिटिंग के कपड़े बनाने वाली कंपनी कार्याः डॉट कॉम की स्तत्पिका निधि अगरवाल कहती है की भारत में औरतों के लिए विभिन सेक्टर्स में कमी है. “व्यक्तिगत तौर पर मानना ​​है कि भारत में महिलाओं उपभोक्ताओं के लिए प्रस्ताव पर कम है”

काफ़ी साल तक ऋषिका चंदन को इन्वेस्टर यह पूछते थे की वह अपने स्टार्टाप के साथ कैसे जूड़ी रहेंगी – ऋषिका के पति ने यह ठान लिए की वह दुनिया को यह दिखाएँगे की वह ऋषिका के आइडिया और बिज़्नेस में खुद भी जुड़ना चाहते हैं. इस लिए नही की ऋषिका को उनकी ज़रूरत थी पर इस लिए की वह ऋषिका की कंपनी होमे सालों के आइडिया में पूरी तरह से समर्पित थे.

महिलाओं को बेहतर स्पष्ट कर सकते हैं. करना आता है लेकिन हम उन्हे आगे बढ़ने का मौका नही देते, कहती है निधि .

महिलाओं को शादी के बारे में क्यों पूछा जाता है? महिलाओं के बच्चों के बारे में पूछा जाता है. महिलाओं के समर्पण के बारे में पूछताछ करते है. महिला महान कार्यकर्ता नहीं हैं? वे हर दिन व्यापार नहीं करते? तो क्यों सवाल महिलाओं पर ?