हम एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहां हम जंक फ़ूड ज्यादा खाते हैं. ऐसे में दिल्ली की रहने वाली इशिरा मेहता और पुनीत झाझरिया चाहते हैं कि हम पौष्टिक अनाज खाने के विषय में सोचे. उनका स्टार्टअप “क्रॉप कनेक्ट” प्रयास कर रहा है कि वह लोगों तक वह क्वालिटी फूड पहुंचाएं जो सालों से भारत में उगाया जा रहा है जैसे रागी और बाजरा.

वह कहती हैं कि भारत की फसलों का पुनः प्रवर्तन तभी संभव है जब खेती-बाड़ी में स्थिरता आएगी. स्टार्टअप के फाउंडर्स पूरे भारत में घूमते हैं ताकि वह स्वस्थ भोजन के ट्रेडिशनल ऑप्शन ढूंढ सके और किसानों को उन्हें उगाने के लिए प्रोत्साहित कर सकें.

दिलचस्प बात यह है कि इन दो उद्यमियों का बैकग्राउंड भोजन में नहीं बल्कि खेती बाड़ी में है.

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इशारा के पास सस्टेनेबल सप्लाई चेन बनाने में 10 साल का आपरेशनल अनुभव है. यह चेन लोकल किसानों को छोटे और मध्यम  उद्यमों से जोड़ती है. उनके इतने साल के अनुभव नहीं उन्हें क्रॉप कनेक्ट शुरू करने के लिए प्रेरित किया.

किसान जो उगाते हैं  और जो ग्राहकों को वास्तव में चाहिए होता है,  इसमें बहुत बड़ा अंतर है – इशारा

“जब मैं इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन के साथ काम कर रही थी तब मुझे बहुत सी  एग्री चेन्स के साथ जुड़ना होता था और उस समय मुझे इस बात का आभास हुआ कि किसान जो उगाते हैं और शहर में रहने वालों की मांग में बहुत अंतर है. तो किसानों के पास वह चीजें थी जो वह बेचना चाहते थे और ग्राहकों को भी बहुत कुछ चाहिए था परंतु दोनों में से किसी को नहीं पता था कि दूसरा क्या कर रहा है और इसी कारण मैंने क्रॉप कनेक्ट शुरू किया ”

वह भारत वासियों के खाना खाने के तरीके को बदलना चाहती हैं और यही उनके स्टार्टअप का मुख्य लक्ष्य है. “हम प्राचीन स्वदेशी अनाज और सामग्रियों को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं. हम इन्हें बाजार में वापस लाना चाहते हैं.  इनमे से ऐसे बहुत से उत्पाद है जो किसानों के लिए फायदेमंद है क्योंकि वह किसी भी मौसम में उगाए जा सकते हैं, उन्हें उगाने के लिए कम केमिकल और पेस्टिसाइड की आवश्यकता होती है.  यह उत्पाद पश्चिमी विकल्पों  की तुलना में अधिक स्वस्थ होते हैं”, उन्होंने बताया.

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